लॉकडाउन से पोल्ट्री फार्मरों पर दोहरी मार

लॉकडाउन से पोल्ट्री फार्मरों पर दोहरी मार

पिछले 1 साल से ज़्यादा टाइम से परेशानी में चल रहे पूर्वांचल के अंडा उत्पादकों और ब्रायलर पालकों के लिए को-रोना के वजह से हुआ लॉकडाउन संकट बनकर आया है. को-रोना संक्रमण के डर से जहां ब्रायलर की मांग घटी, वहीं लॉकडाउन के चलते लेयर फार्मेरो को ख़रीददार नहीं मिल रहे हैं.

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करो-ना और उससे बचने के लिए किए गए लॉकडाउन से पूर्वांचल के ब्रायलर और लेयर फार्म वाले बर्बाद हो गए है. लगभग एक वर्ष से ज्यादा टाइम से संकट में चल रहे अंडा उत्पादकों के लिए को-रोना और लॉकडाउन डबल मार लेकर आया है.
लॉकडाउन के चलते फार्मेरो के फार्म पर लाखों अंडे बेकार पड़े हैं. उन्हें खरीदार नहीं मिल रहे हैं. उन सब का डर है कि यही चलता रहा तो ये अंडे सड़कर खराब हो जाएंगे और उन को भारी नुकसान होगा.
Poultry फर्मो के मालिकों का कहना है कि उनके लिए बर्ड्स को फीड खिलाना तक बहुत मुश्किल हो गया.
कोरो-ना के वजह से होली से काफी पहले ही लोग ब्रायलर खाने से बचने लगे थे. इस वजह से ब्रायलर की मांग घटती गई. हालात इतने बुरे हो गए कि Poultry फार्म मालिकों ने 20₹ किलो broiler बेच कर अपना farm बंद कर दिया है.
कुछ poultry फार्मेरो ने free में मुर्गा दे दिया और चिक्स को फेंक दिया
Broiler और layer farm से जुड़े कई हज़ारो मजदूर बेरोजगार हो चुके हैं. कुकुट व्यवसायों में लगे फार्मरों को लाखों का घटा हुआ है और वे bank से लिए गए कर्ज की EMI तक नहीं दे पा रहे हैं.

बढ़िया शुरुआत के बाद पड़ी महंगाई की मार

Uttar Paradesh पोल्ट्री नीति 2013 के वजह  से प्रदेश में छोटे सकेल पे लेयर फार्मों की स्थापना बहुत संख्या में हुई और प्रदेश में अंडे का उत्पादन काफी तेजी से बढ़ा.
पिछले 6 सालो में gorakhpur mandal के चार जिलों- गोरखपुर, कुशीनगर, देवरिया और महराजगंज में 200 से भी ज्यादा लेयर फार्मो की स्थापना हुई.
लेयर फार्म से जुड़ने वाले अधिकतर युवा हैं जिन्होंने बैंकों से लोन लेकर अपना फार्म शुरू किया. गोरखपुर में 24 लेयर फार्म 50 हजार बर्ड की क्षमता के स्थापित हुए जबकि 10 हजार बर्ड की कैपेसिटी वाले लेयर फार्मों की संख्या 60 से भी से अधिक हैं.
गोरखपुर मंडल में खुले लेयर फार्मो की उत्पादन क्षमता 25 लाख अंडा 1दिन की है. कुछ ऐसे भी बड़े अंडे के फार्म हैं जो एक दिन में 1लाख अंडा उत्पादित करते हैं. 10 हजार से 20 हजार अंडा 1दिन में उत्पादित करने वाले फार्मों की संख्या ज्यादा है.
शुरू में तो कारोबार बहुत अच्छा चला लेकिन सरकार की तरफ से संरक्षण न मिलने की वजह से अब उनकी हालत खस्ता होने लगी.
पोल्ट्री फार्मरों पर अधिक मार तब पड़ी जब सरकार ने मक्का और सोया की MSP बढ़ा दी, जिसके कारण मुर्गी फीड के दाम काफी अधिक बढ़ गये. इससे लेयर मुर्गी के दाना का दाम 25₹ किलो और ब्रायलर मुर्गियों के फीड का दाम 35₹ किलो हो गया है जो 2018 में 19₹ kg और 30₹kg हुवा करता था।
इस तरह से 10 हजार बर्ड के लेयर फार्म वाले फार्मरों को 1दिन का 9 हजार रुपये और महीने में 2.70 लाख रुपये का नुकशान हुआ. बढ़ते नुकशान के वजह से लेयर फार्मरों ने अंडे का उत्पादन कम करना शुरू किया.
गोरखपुर मंडल में 25 लाख अंडो का उत्पादन हर रोज का था लेकिन कारोबार में नुकशान की वजह से फार्मरों ने उत्पादन लगभग आधा कर दिया लेकिन फिर भी संकट से निकल नही पाए।
लेयर फार्मरों ने सरकार के मंत्रियो और अफसरों से मिल कर राहत की मांग की फिर भी उनकी कोई सुनवाई नही हुई
फार्मरों की मांग थी कि सरकार खुद से  अंडे का मूल्य निर्धारित करे जो कि हरियाणा-पंजाब के बड़े अंडा उत्पादक करते हैं. सरकार अंडे का MSP तय करे,  सोया और मक्का पे सरकार सब्सडी दे या तो सब्सिडी वाला फीड उपलब्ध कराये और उत्तर प्रदेश सरकार मिड-डे मील में अंडे को भी शामिल करे।
लेकिन सरकार ने फार्मरों की एक भी मांग नहीं मानी जिससे उनकी हालत और खराब होती चली गयी. कई अंडा फार्मरों ने अधिक घाटे से परेशान होकर अपना कारोबार बंद कर दिया.

कोरोना के चलते हुए लॉकडाउन से पड़ी दोहरी मार

कोरोना के चलते देश में हुए lockdown अंडा farmaro पर doubal मार पड़ी है. 22-mar-2020 के जनता कर्फ्यू के बाद से ही मार्किट पूरी तरह बंद हैं. अंडों की आपूर्ति नहीं हो पा रही है.
लेयर फार्मरों के हिसाब से 10 हजार बर्ड के लिये 1दिन का खर्चा 30 हजार ₹ है. अभी तो हालात ये है की मुर्गी दाना भी नहीं मिल पा रहा है. आज की टाइम में उनके सामने लेयर फार्म बंद करने के सिवा कोई चारा नहीं हैं. फार्म पर अंडे भरा हुवा है।
फार्मरों ने कमिश्नर से बात कर के लॉकडाउन के बाहर निकले का पास और अंडे की गाड़ी को न रोके जाने आदेश लिया है लेकिन इस टाइम वो अंडा बेचे तो बचें किसे क्योंकि सब बाजार बन्द है ठेले पे अंडे बेचने वाला भी घर पे बैठा है अगर ऐसा ही चला रहा तो फार्म पे रखा अंडा सड़ जायेगा और फार्मर बर्बाद हो जायेगा।
ब्रायलर फार्म वालों ने होली को देखते हुये बहुत अधिक संख्या में ब्रायलर तैयार किए थे लेकिन होली पे उनकी बिक्री में बहुत कमी आई और होली पे बर्ड 8-12 रुपये किलो बिके.
होली के  बाद भी हालात सुधरने की जगहा बिगड़ते चले गए कई ब्रायलर फार्म वालों ने अपने मुर्गे 2-8 रुपये किलो बेचकर खाली कर दिए.
अभी लॉकडाउन के कारण ब्रायलर फार्म वालों के पास मुर्गों को खिलाने के लिए दाने नहीं मिल रहे हैं.
महराजगंज जिले के पनियरा क्षेत्र के पोल्ट्री फार्म मालिक छविलाल ने शुक्रवार को अपने फार्म के 30 क्विंटल ब्रायलर लोगों में बांट दिए. इस क्षेत्र के 2 और पोल्ट्री फार्म वालों ने भी यही काम किया.

सरकार से निवेदन है की ब्रायलर और लेयर फार्मरों को भी राहत पैकेज दे।

लॉकडाउन से पोल्ट्री फार्मरों पर दोहरी मार

https://www.thebropoultry.com/what-is-broiler-broiler-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%88-broiler-history/

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